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बुधवार, 2 अक्टूबर 2013

ब्रिटिश शासन (ईस्ट इण्डिया कंपनी का शासन ) : 1757-1858

मुग़ल शासन समय काल में ब्रिटेन में ईस्ट इण्डिया कंपनी की स्थापना (सन् 1600 में ) हुई | वैसे तो इसकी स्थापना का मुख्य उद्देश्य भारत में आकर यहाँ व्यापार करना था परन्तु भारत की आर्थिक सम्पन्नता व इसकी राजनैतिक अस्थिरता के कारण कंपनी के शासक वर्ग ने भारत में अपनी सत्ता स्थापित करने हेतु प्रयास करने शुरू कर दिये | कंपनी का शासन गठित किये गए मंडलों(बोर्डो) द्वारा चलाया जाता था जिनमे सबसे महत्वपूर्ण बोर्ड व्यापार मंडल सैनिक मंडल थे | ब्रिटिश सरकार इस कंपनी पर नियंत्रण रखने हेतु
समय-समय पर अधिनियम(एक्ट) पारित किया करती थी | इनमें सन् 1773 का रेग्युलेटिंग एक्ट कंपनी की स्थापना के पश्चात इस पर ब्रिटिश सरकार के नियंत्रण हेतु पारित किया गया प्रथम अधिनियम/एक्ट है | इस एक्ट से जहाँ एक तरफ कंपनी की फिजूलखर्ची पर रोक लगाकर  व उच्चतम न्यायालय की स्थापना करके भारत में शासन के स्वरुप को सुधारने का प्रयास किये गए तो दूसरी तरफ  गवर्नर जनरल को असीमित सैनिक व राजस्व अधिकार देकर व उच्चतम न्यायालय में ब्रिटेन के कानून के तहत भारतीय लोगो पर मुकदमा चलाने का आदेश देकर इसके सकारात्मक प्रभावों को कम कर दिया गया | इस एक्ट की कुछ गलतियों को सन् 1781 के एक्ट में सुधार गया | इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए ब्रिटिश सरकार ने सन् 1784 के पिट्स इण्डिया एक्ट/अधिनियम को पारित कर ईस्ट इण्डिया कंपनी पर अपना नियंत्रण और अधिक बड़ा दिया | कंपनी के शासन को चलाने हेतु केंद्रीय सचिवालय की स्थापना की गयी थी जिसमे विभिन्न विभाग हुआ करते थे , जिनमें से राजस्व विभाग, सेना विभाग तथा विदेश विभाग प्रमुख थे | इनके अतिरिक्त गोपनीय विभाग, न्याय विभाग, वित्त विभाग भी महतवपूर्ण भूमिकाओं में थे |
                 ब्रिटिश शासन की प्रमुख देन जिला प्रशासन व जिलाधिकारी का पद था जोकि सन् 1772 में वारेन हेस्टिंग्स द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से सृजित किया गया था | सन् 1785 तक जिले ने स्थानीय प्रशासन योजना में केंदीय स्थान हासिल कर लिया था | सन् 1786 में जिले को प्रशासन का आधार बना देने के पश्चात कलक्टर ही राजस्व कलक्टर, न्यायाधीश व मजिस्ट्रेट के कर्तव्यों का निर्वाह किया करता था | वर्तमान में भी कुछ न्यायिक व दाण्डिक शक्तियों को छोड़कर जिलाधिकारी के कर्त्तव्य पूर्व की भांति व और अधिक मात्रा में बड़ते हुए और अधिक महतवपूर्ण हो चुके हैं | कुछ वर्षों पश्चात सन् 1829 में कुछ जिलों को मिलाकर एक मंडल बनाया गया व इसे राजस्व/सर्किट आयुक्त के अधीन कर दिया गया | यही व्यवस्था वर्तमान में भी बनी हुई है |
                 ब्रिटिश शासन की महत्वपूर्ण खोजों में से एक है सिविल सेवा | पूर्व की संरक्षण वादी  व्यवस्थाओं को रोकने हेतु ब्रिटिश सरकार ने सन् 1793 का चार्टर अधिनियम पारित किया जिसमे वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नति की व्यवस्था लागू की गयी | सिविल कर्मचारियों के लिये प्रशिक्षण व पाठ्यक्रम की अनिवार्य व्यवस्था के साथ ही प्रशिक्षण कॉलेज (1805 में इंग्लेंड में हेलीबरी कॉलेज ) की स्थापना की गयी | मेकाले समिति की सिफारिश पर सिविल सेवा में प्रवेश हेतु प्रतियोगिता परीक्षा का आयोजन किया जाने लगा जिसमे पहली परीक्षा सन् 1855 में हुई |
                सन् 1857 की क्रांति के तुरंत बाद ब्रिटिश सरकार ने 1858 का अधिनियम पारित कर ईस्ट इंडिया कंपनी का शासन भारत से खत्म कर अपने हाथ में ले लिया तथा 1858 से भारत सीधे ब्रिटेन की साम्रागी के शासन के अधीन आ गया |

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